फिल्मः आन्दोलन
गीतः बिस्मिल
संगीतः जयदेव
स्वर : भूपेन्द्र
दरो दीवार पे हसरत से नजर करते हैं
दरो दीवार पे हसरत से नजर करते हैं
खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं
हम भी आराम उठा सकते थे घर पर रहकर
हमको भी पाला था मां-बाप ने दुख सह-सहकर
वक्त रुख्सत उन्हें इतना भी न आए कहकर
गोद में आंसू जो टपके कभी रुख से बहकर
तिफ्त उनको ही समझना जी के बहलाने को
अपनी किस्मत में अज्ल से ही सितम रखा था
रंज रखा था, गम रखा था, गम रखा था
किसको परवाह थी और किसमें ये दम रखा था
हमने जब वादिए गुरबत में कदम रखा था
दूर तक यादे वतन दिल फिदा करते हैं
कुर्बान जिगर करते हैं
पास जो कुछ है वो माता की नजर करते हैं
खाना वीरान कहीं देखिए घर करते हैं
खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं
जाके आबाद करेंगे किसी वीराने को
नौजवानो यही मौका है उठो खुल खेलो
खिदमते कौम में जो आए बला सब झेलो
देश आजाद हो क्या गम है जवानी दे दो
फिर न मिलेगी ये माता की दुआएं ले लो
देखें कौन आता है ये फर्ज बजा लाने को
0 टिप्पणियाँ