गंगा मांग रही बलिदान गाने के बोल


फिल्मः गंगा मांग रही बलिदान
गीतः प्रेम धवन
स्वर : मन्नाडे
संगीतःप्रेम धवन





गंगा मांग रही बलिदान






दुश्मन फिर सिर पर आ पहुंचा भारत मां ने पुकारा है
आओ जिसको जान से अपनी देश का गौरव प्यारा है
गंगा मांग रही बलिदान गंगा मांग रही कुर्बानी
आज वतन पे जो मिट जाए वो है सच्चा हिन्दुस्तानी
गंगा मांग रही बलिदान...






जिस धरती ने जन्म दिया, घायल है उसका सीना
उठो इस धरती के बेटो, मर के सीख लो जीना
कह दो इस दुनिया से, खून हमारा नहीं है पानी
गंगा मांग रही बलिदान.






एक के बदले सौ मरेंगे, ये सौगंध उठा लो
हत्यारों के लाल खून से, तलवारें रंग डालो
लिखेंगे हम इसी खून से अब तो नई कहानी
गंगा मांग रही बलिदान...






मर्दो से भी आगे निकल पड़ी, इस देश की नारी
ज्वाला बनके भड़क उठी ये दबी हुई चिनगारी
टूट पड़ी दुश्मन पर ये तलवार पकड़ के
जैसे रेत में छिपी हुई एक बिजली कड़के
चूम के देश की माटी को और प्रण ये करके
मारेंगे दुश्मन को या रह जाएंगे मरके
जिनको ऐसी मौत है मिलती, धन्य उनकी कुर्बानी
गंगा मांग रही बलिदान...


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