तुम समय की रेत पर छोड़ते चलो निशां
तुम समय की रेत पर छोड़ते चलो निशां
देखती तुम्हें जमी, देखता है आसमां।
लिखते चलो नौजवां नित नई कहानियां
तुम मिटा दो ठोकरों से जुल्म की निशानियां
कल की तुम मशाल हो सबसे बेमिसाल हो,
तिनके-तिनके को बना दो, जिंदगी का आशियां ।
तुम समय की रेत पर...
ये निशान एक दिन जहान का अमन बने
ये निशान एक दिन प्रीत का चमन बने,
हंसते हुए हमसफर गाते चलो हो निडर,
आगे-आगे बढ़ता चले जिंदगी का कारवां ।
तुम समय की रेत पर...
तुम जिधर चलो उधर रास्ता बने नया
एक उठाए सबका बोझ वक्त ये चला गया
सब कमां साथ-साथ काम करें सबके हाथ
जो भी आगे बढ़ रहा है देखता उसे जहां।
तुम समय की रेत पर...
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