संगीतः एन. दत्ता
फिल्मः धूल का फूल
गीतः नीरज
स्वर : रफी
तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा।
अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है
तुझको किसी मजहब से कोई काम नहीं है
जिस इल्म ने इंसान को तकसीम किया है
उस इल्म का तुम पर कोई इलजाम नहीं है।
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा।
इंसान की औलाद.
मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया
कुदरत ने तो बख्शी थी हमें एक ही धरती
हमने कहीं भारत कहीं ईरान बनाया
जो तोड़ दे हर बन्द वो तूफान बनेगा।
इंसान की औलाद...
नफरत जो सिखाए वो धरम तेरा नहीं है
इन्सां को जो रौंदे वो कदम तेरा नहीं है
कुरआन न हो जिसमें वो मन्दिर तेरा नहीं है
गीता न हो जिसमें वो हरम तेरा नहीं है
तू अमन का और सुलह का फरमान बनेगा।
इंसान की औलाद...
ये दीन के ताजिर ये वतन बेचने वाले
इन्सां की लाशों के कफन बेचने वाले
ये महलों में बैठे हुए कातिल ये लुटेरे
कांटों के एवज रूहे-चमन बेचने वाले
तू इनके लिए मौत का ऐलान बनेगा।
इंसान की औलाद...
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