गीतः शैलेन्द्र
फिल्मः प्रेम पुजारी
संगीतः एस. डी. बर्मन
स्वर : रफी, मन्नाडे व साथी
ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन हमसे है
ताकत वतन की हमसे है, हिम्मत वतन हमसे है
इज्जत वतन की हमसे है, इंसान के हम रखवाले...
पहरेदार हिमालय के हम, झोंके हैं तूफान
सुनकर गरज हमारी सीने फट जाते हैं चट्टान के,
हा-हा, हा-हा-हा, पहरेदार...
सीना है फौलाद का अपना, फूलों जैसे दिल हैं
तन में विंध्याचल का बल है, मन में ताजमहल है
ताकत वतन की हमसे है, हिम्मत वतन की...
देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बंदूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी...
ताकत वतन की हमसे है...
इज्जत वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले...
आकर कसम दे गई राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश, मगर न देंगे मिट्टी वतन की
ताकत वतन की हमसे है...
खतरे में हो देश अरे लड़ना सिर्फ धर्म है
मरना है क्या चीज आदमी लेता नया जन्म है
एक जान है एक प्राण है सारा देश हमारा
सदियां चलकर थकीं रुकीं पर रुकी न गंगा धारा
ताकत वतन की हमसे है, हिम्मत वतन की...
इज्जत वतन की हमसे है...
0 टिप्पणियाँ