देशभक्त भगतसिंह की ये कहानी तन्दाना गाने के बोल


फिल्मः सरफरोश
गीतः आनन्द बख्शी
संगीतः लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
स्वर : आशा भोंसले





देशभक्त भगतसिंह की ये कहानी तन्दाना






तन्दाना, तन्दाना, तन्दाना,
याद रखना भूल न जाना
वीर अमर शहीदों की ये कुर्बानी
देशभक्त भगतसिंह की ये कहानी, तन्दाना

इन विदेशियों का यहां राज है
जुल्मो सितम के सर पे ताज है
सदियों से फिरंगी लुटेरे
डाले हुए हैं यहां पे डेरे
जब न रुक सकी जुल्म की ये आंधी
बनके तूफान उठा गांधी
गांधी ने देश को जगाया
भगतसिंह ने नारा लगाया
इंकलाब जिन्दाबाज, इंकलाब जिन्दाबाद
जाग उठे नींद से सब हिन्दुस्तानी
देशभक्त भगतसिंह की...






बचपन से गर्म उसका खून था
सर पे आजादी का जुनून था
खेत में एक दिन जो पूछा बाप ने
बोया क्या है जमीन में आपने
वो बोला सपने पिरो रहा हूं,
धरती में बंदूकें बो रहा हूं
इक दिन चलेंगी इनसे गोलियां





खेलनी हैं अब लहू से होलियां





इस गुलामी की है मुझे लाश बिछानी,
देशभक्त...

आंसू रोकू अपने दिल को थाम लूं
जलियां वाले बाग का अब नाम लूं
यूं निहत्थे बेबस बेचारे जाने कितने लोग गए मारे
अमन कायम रखने का तो नाम था
कुछ न था सिर्फ कत्लेआम था
खून से लथपथ वो लाल मिट्टी
थोड़ी-सी उठाके उसने रख ली
क्योंकि मरने वालों की थी वो निशानी
देशभक्त...

हो गई सरकार अलफ नंगी
यमदूत बन गए फिरंगी
जो भी थे दस्तूर बदल डाले
सैकड़ों मासूम मसल डाले
राजगुरु सुखदेव और दत्त से
साथियों से मिलके भगतसिंह ने
आठ अप्रैल उन्नीस सौ उन्तीसवें साल में
फेंका बम असेम्बली हॉल में
चिंगारी भड़क उठी बरसों पुरानी
देशभक्त...

उस एक धमाके ने जो शोलों को हवा दी
अंग्रेजो चले जाओ वतन छोड़ो हमारा
हर सितम से बस गूंज उठा एक ही नारा
इंकलाब जिन्दाबाद
छोटी थी बहुत उम्र हुआ कितना बड़ा वो
इतनी बड़ी ताकत के हुआ आगे खड़ा वो


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