ऐ किसानो ये धरती तुम्हारी है मां गाने के बोल


फिल्मः गंवार
संगीतः नौशाद
गीतः राजेन्द्र कृष्ण
स्वर : महेन्द्र व साथी





ऐ किसानो ये धरती तुम्हारी है मां






https://www.youtube.com/watch?v=GNFLp_Wshzo
ऐ किसानो ये धरती तुम्हारी है मां





ऐ किसानो ये धरती तुम्हारी है मां
जिन्दगी में कोई मां से प्यारा नहीं
मेरी आवाज सुन लो मेरे साथियो
फिर न कहना कि तुमको पुकारा नहीं
आओ मेरे साथियो...






वो कौन है जो मां की तरह नाज उठाए, पलकों पे बिठाए
दे दे के अपना लहू जो फसलों को उगाए खेतों को हंसाए
यही धरती यही धरती, वो कौन है जो मां...






गर्मी हो सर्दी कभी होती नहीं बेकल
चुपचाप सहा करती है बरसात का जल थल
खुद मिट के इसे आता है औरों को बनाना
कुछ भी न कहे छाती पे दिन-रात चले हल
भूखा तो उठाए, कभी भूखा न सुलाए फाकों से बचाए
यही धरती यही धरती, वो कौन है जो मां...






इतना बड़ा सागर कहो आए कहां से
जीने के ये सामान भला आएं कहां से
इंसान ने ये हीरे ये मोती ये जवाहर
पाए तो हैं मेहनत से मगर पाए कहां से, कुछ भी न छुपाए
यही धरती यही धरती, वो कौन है जो मां...






धरती की इसी धूल में जीवन है सभी का
देती है ये पैगाम जमाने को खुशी का
चंदन को जो शरमाए यही तो खुशी का
इस माटी से माथे पे लगाते चलो टीका
वो कौन है आकाश जिसे चूमने आए, सीने से लगाए
यही धरती है यही धरती, वो कौन है जो मां...


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