संगीतः प्रेम धवन
फिल्मः भारत के शहीद
गीतः प्रेम धवन
स्वर : महेन्द्र कपूर व साथी
इधर सरहद पे बहता है लहू अपने जवानों का
इधर सरहद पे बहता है लहू अपने जवानों का
उधर डूबे हुए हम शराबों और जामों में
न संभलोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्तां वालो
तुम्हारी दास्तां तक भी न होगी दास्तानों में
संभालो ऐ वतन वालो वतन अपना संभालो
जिस वतन के वास्ते लाखों ने अपनी जान दी
जान दी, जाने नहीं दी आन हिन्दोस्तान की
कहानी उन शहीदों की न भूलो हिन्द वालो
संभालो ऐ वतन वालो वतन अपना संभालो
जंजीरों से बंधी हुई थी सदियों से भारत माता
इन्हें तोड़ने वाला पहला बागी मंगल पांडे था
छीन के बोला कारतूस वो अपने फौजी भाइयों से
गाय और सुअर की चर्बी तोड़ो न अपने दांतों से
करवाई मंगल ने बगावत नाम धर्म का लेकर
चारों ओर ये ज्वाला भड़की 57 का हुआ गदर
बढ़ा पकड़ने यूसन तो मंगल ने निशाना बना दिया
पल में विदेशी हाकिम को मिट्टी में उसने मिला दिया
गोरे शाही के सीने में चली ये पहली गोली थी
करके सर ऊंचा भारत मां मंगल की जय बोली थी
मंगल पांडे की जय
हैदर अली ने जड़ें हिला दी अंग्रेजी सरकार की
गूंज रही झंकार अभी तक टीपू की तलवार की
पेशवाजी ने कमल चपाती से क्रांति संदेश दिया
फांसी चढ़कर तात्या टोपे ने जीवन बलिदान किया
नाना फड़नवीस ने आखिरी दम तक हार नहीं मानी
लड़ते-लड़ते अमर हुईं मरदानी झांसी की रानी
कटे हाथ से लड़े कुंवर सिंह हार गई गोरी सरकार
आज भी गौरव से लेता है उस योद्धा का नाम बिहार
बहादुर शाह जफर ने दी तीनों बेटों की कुर्बानी
मौत आई रंगून में तो बोले आंखों में भर पानी
कितना है बदनसीब जफर दफन के लिए
दो गज जमीन भी न मिली कुए यार में
लुधियाना के गुरु राम सिंह जिनका रहेगा नाम अमर
अट्ठारह सौ चौबीस में वो जन्मे थे इस धरती पर
अंग्रेजों से लड़ने चले मालेर कोटला इनके जवान
गोरों की तोपों के मुंह में चली गई कितनों की जान
रामसिंह को गाली दी जब के काबान कमिश्नर ने
पकड़ लिए तब केश उछलकर एक नन्हे-से बालक ने
छोड़ा न जो छुड़ाने पर तो काट दिए बालक के हाथ
गिरा तड़पकर नन्हा बालक छूट गया प्राणों का साथ
इधर रामसिंह हो गए बन्दी और बर्मा की जेल गए
देश की आजादी के लिए ये कहते जान पे खेल गए
वन्दे मातरम...
जब भी बोलो वन्दे मातरम याद करो तुम बंकिम को
जिस बंगाली देश भक्त ने अमर गान दिया हमको
राष्ट्र गीत जन गन मन के उस महाकवि को करो प्रणाम
भूलेगा न देश कभी रविन्द्रनाथ टैगोर का नाम
वासुदेव बलवंत फड़के करते थे नौकरी सरकारी
मिली न छुट्टी इनको जब मर गईं इनकी माता प्यारी
किए प्रतिज्ञा उसी समय कि केश नहीं कटवाऊंगा
अंग्रेजी सरकार को जब तक देश से नहीं हटाऊंगा
लेके जवानों की टोली टूट पड़े अंग्रेजों पे
फूंक दिए सरकारी अदालत हाथ न आए गोरों के
एक दिन जब बीमार पड़े थे मेजर डेनियल आ पहुंचा
धोखे से उस वीर पुरुष को आखिर उसने पकड़ लिया
हुई सजा काले पानी की पर वो जेल से हुए फरार
दोबारा जब पकड़े गए तो हुए शहीद त्याग संसार
वो था श्याम किशनजी वर्मा कच्छ का सबसे प्यारा लाल
जिसने जलाई लंदन में क्रांति की पहली बार मशाल
वीरेन्द्रनाथ ने लंदन में कर दी गोरों की नींद हराम
पृथ्वीसिंह ने राज उलटने में पाया था ऊंचा नाम
हरदयाल ने देश विदेश में क्रांति की ज्वाला भड़काई
पंडित काशीराम ने भी क्रांति के लिए फांसी पाई
बरकत उल्ला ने कायम की गदर पार्टी की बुनियाद
रखता है महेन्द्र प्रताप को काबुल बर्लिन अब तक याद
गदर पार्टी के लीडर थे बाबा सोहनसिंह भखना
सोहनलाल पाठक चढ़ फांसी लुटा गए जीवन अपना
करतारसिंह सरावा आए छोड़ विदेश को अपना देश
गोरों की छावनी में पहुंचे देने क्रांति का संदेश
गोरों को भी थी सभी खबर फिर भी न रुका ये दीवाना
हाथों में हथकड़ी लगी थी पर कहता था मस्ताना
सेवा देश की जिन्दगिये बड़ी औखी
गल्लां करनियां ढेर सुखल्लियां वे
फांसी का फंदा चूमा था वीर मराठा पिंगले ने
दक्षिण में स्वदेशी आन्दोलन किया चिदम्बरम पिल्ले ने
झांसी के परमानंदजी लाहौर परमानंद भाई
जिन्होंने अमरीका तक क्रांति की आवाज पहुंचाई
नाम था मैडम कामा ही उस हिन्दोस्तान की बेटी का
लहराया जंग में जिसने झंडा आजादी का
रामरखा ने किया था अनशन अंडमान की जेल में
खेल गए वे जान की बाजी आजादी के खेल में
धन्य है रत्नागिरी जहां पे बाल तिलक ने जन्म लिया
स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है ये पैगाम दिया
पत्र केसरी और मराठा से जनता को जगाने लगे
अपनी कलम के जोर से वो शासन की नींव हिलाने लगे
शिवजयंती गणपति उत्सव महाराष्ट्र में शुरू किया
धर्म के संग आजादी का भी घर-घर में संदेश दिया।
दादा भाई नौरोजी को राष्ट्र पितामह कहता देश
बना के नेशनल कांग्रेस स्वराज्य का दिया प्रथम संदेश
वो मतवाला बिपिनचन्द्र बंगला का था रहने वाला
भड़काई थी जिसने जन-जन में आजादी की ज्वाला
रखना याद किशन सिंह को जो भगत सिंह के पिता महान
देश आजाद कराने में कम नहीं इनका भी बलिदान
जितने वीर अजीत सिंह थे स्वर्ण सिंह उतने ही दिलेर
भगत सिंह के चाचा दोनों कहलाते पंजाब के शेर
दिया मुरादाबाद की धरती ने सूफी अम्बाप्रसाद
कटे हाथ से भी जो योद्धा लड़ा था अंग्रेजों के साथ
याद करो ऐ लोगो चाफेकर बन्धुओं की कुर्बानी
जिन्होंने अत्याचारी रेण्ड को मार मिटाने की ठानी
जश्न मनाकर मलका का जहां रेण्ड आ रहा था सरेआम
दामोदर और बालकिशन छुपकर जा पहुंचे उसी मुकाम
एयरिस्ट को मारा बालकिशन ने मारा रेण्ड दामोदर ने
गोरे अफसर पकड़ न पाए दोनों भाई हुए फरार
मुखबिर बना गणेश द्रविड़ हो गया दामोदर गिरफ्तार
तिलक से गीता मंगवाकर फांसी पे चढ़ गए दामोदर
दूजे भाई वासुदेव ने मुखबिर गणेश को जा मारा
मौत का बदला मौत से लेकर हो गया मौत को वो प्यारा
कसम ऐसे शहीदों की तुम्हें ऐ देश वालो
संभालो ऐ वतन वालो वतन अपना संभालो
संभालो ऐ वतन वालो वतन अपना संभालो
जिस वतन के वास्ते लाखों ने अपनी जान दी
जान दी जाने नहीं दी आन हिन्दुस्तान की
कहानी उन शहीदों की न भूलो हिन्द वालो
संभालो ऐ वतन वालो वतन अपना संभालो
नहीं है मोतीलाल-सा कोई सारे भारत में मोती
जवाहर-सा कुलदीप दिया और ज्योति इंदिरा-सी पोती
झोंक दिया जेलों की धधकती ज्वाला में जीवन अपना
दादा ने जो देखा था पोती ने किया पूरा सपना
1889 का दिन था 14 नवम्बर रखना याद
जन्मे जवाहरलाल इसी दिन धन्य हो गया इलाहाबाद
त्याग के सुख आनंद भवन का आजादी के पथ पे चले
लंदन से युवराज आया तो काले झंडे लेके बढ़े
जेल चले जब तो पत्नी ने तिलक लगाया हाथों से
हार न मानी कभी इन्होंने अंग्रेजों की घातों से
जब आजादी का पहला झंडा लहराया था नभ में
नेहरू को प्रधानमंत्री माना सारे भारत ने
कहते थे चाचा नेहरू ये बच्चे कल की मूरत हैं
ये बांध, ये कल, ये कारखाने नेहरू के बनाए तीरथ हैं
पंचशील का नया संदेश सबको दिया जवाहर ने
नाम अपने भारत का रोशन जग में किया जवाहर ने
गोपालकृष्ण गोखले को आओ शीश नवाएं हम
भारत मां के दुलारे पे श्रद्धा के फूल चढ़ाएं हम
सुरेन्द्र बनर्जी जेल गए थे बंग-भंग आंदोलन में
नागपुर के खानखोजे ने फूंकी ज्वाला जन-जन में
अनाथ पंजा ने बुर्गे को मौत के घाट उतारा था
प्रयोत भट्टाचार्य ने जालिम डगलस को मारा था
बाबू गेनू ने वस्त्र विदेशी के विरोध में प्राण दिए
रुकी नहीं लारी तो ये लारी के नीचे लेट गए
था अट्ठारह साल का बालक खुदीराम था जिसका नाम
संग में लेके प्रफुल्ल को किया था उसने भारी काम
किंग्स फोर्ड की गाड़ी पे उसने ही जा बम फोड़ा था
चूम के फांसी के फंदे को मौत से नाता जोड़ा था
मन में लगन थी आजादी की तन पे शहीदी बाना था
जाते-जाते वीर के होंठों पर बस यही तराना था
एक बारे बिदाय दे मां घरे आशी
आमी हांशी-हांशी पोरबो फांशी देखबे जोगोत वाशी
किया कोन्हाईलाल ने सत्येन बोस को लेकर काम महान
जेल में बंदी रहकर भी ले ली थी एक मुखबिर की जान
देशबंधु चितरंजनदास को भूलेगा न हिन्दुस्तान
आजादी के महायज्ञ में कर गए तन मन धन सब दान
बड़ा दिलेर था अवध बिहारी बड़ा ही शेर था बालमुकन्द
जिन्होंने संग अमीरचन्द के फेंका था दिल्ली में बम
आई.एन.ए. की नींव धरी दादा ने ही जापान में
मरते दम तक देश की सेवा की इस वीर महान ने
जितेन्द्रनाथ सान्याल थे सच्चे रास बिहारी के
जेलों में ही जीवन काटा मरे वहीं बीमारी से
यतीन्द्र मुखर्जी बाघा के नाम से जाने सब बंगाल
बलासार के बन में पहुंचा लेने शस्त्र जब मां का लाल
चमक उठी संगीन पुलिस की गरज पड़ी इन पे गोली
लड़ते-लड़ते घिरी पुलिस से क्रांति वीरों की टोली
घायल हो गया चित्त प्रिय तो ले यतीन्द्र उन्हें बांहों में
वार लगे गोरों पर करने मौत से घिरी घटाओं में
निरेन मनोरंजन, ज्योतिष गिर पड़े थे जब गोली खाकर
तब यतीन्द्र भी गिरे जोर से पानी पानी चिल्लाकर
जोल...जोल...जोल...
सोने चले मौत की गोद में बाधा यतीन्द्र घायल होकर
आज भी करती भारत माता याद उन बेटों को रो-रोकर
वतन एक सर जो मांगे तो हजारों सर कटा लो
संभालो ऐ वतन वालो वतन अपना संभालो
संभालो ऐ वतन वालो वतन अपना संभालो
जिस वतन के वास्ते लाखों ने अपनी जान दी
जान दी जाने नहीं दी आन हिन्दुस्तान की
कहानी उन शहीदों की न भूलो हिन्द वालो
महाराष्ट्र का नासिक है सावरकरजी का जन्म स्थान
अभिनव भारत क्रांति सभा में दाखिल किए थे वीर जवान
रानी झांसी मंगल पाण्डे कुंअर सिंह की कथा महान
जब लंदन में जाके सुनाई तड़प उठा तब मदन जवान
एक जासूस था अंग्रेजों का कर्जन वायली जिसका नाम
मदन ढींगरा पहुंचा वहां पर करने उसका काम तमाम
ले गई हुकूमत इसी जुर्म में सावरकर को बागी मान
लेकिन कूद गए सागर में लेके हथेली पे वो जान
अंडमान की जेल में भी गर्दन न उनकी कभी झुकी
थी आजाद आवाज उनकी और ये आवाज उनकी न कभी रुकी
स्वतंत्रते भगवती...स्वतंत्रते भगवती..
गणेश सावरकर को मिली जबकि जेक्सन से सख्त सजा
अनन्त कन्हेरे मारके जेक्सन को फांसी पे झूल गया
आजादी और धर्म का जिसकी रग-रग में भरपूर था जोश
भारत क्या सारी दुनिया में, चमके थे अरविन्द घोष
वारिन्द्र घोष अरविन्द घोष का छोटा भाई प्यारा था
आजादी के लिए जिया और इसी पे तन-मन वारा था
विनय बोस पिस्तौल अगर था, तो बादल उसकी गोली
दिनेश गुप्ता के संग खेले सिम्पसन के खून से होली
गूंज रहा मद्रास में अब तक घर-घर कटबामन का नाम
हिल गया अंग्रेजी शासन छेड़ा उसने ऐसा संग्राम
जिस जज ने इल्जाम लगाया उसे अदालत में मारा
फांसी के अंतिम दिन भी गाता रहा दक्षिण का तारा
अच्च मिल्लय...अच्च मिल्लय..
मक्के में एक दिया जला जो कर गया रोशन हिन्दुस्तान
अब्दुल कलाम आजाद था वो, हिन्दु मुस्लिम दोनों की जान
मास्टर दा ने चिटगांव से ब्रिटेन का झण्डा हटा दिया
प्रीतलाल ने गोली से गोरों के क्लब को उड़ा दिया
जिनको कहते सब नेताजी, कटक में उनका हुआ जन्म
रंगा था क्रांति के रंग में बचपन से ही उनका मन
नारा दिया जयहिन्द का और हर दिल में ज्वाला भर दी
बोले तुम दो खून मुझे मैं दूंगा तुमको आजादी
कांप उठी गोरे शाही और घर में उनको कैद किया
लेकिन भेष बदल वो निकले सिंगापुर विश्राम किया
ले आजाद हिंद सेना भारत को आजाद कराने को
टूट पड़े अंग्रेजों पर गोरी सरकार मिटाने को
सुभाष चन्द्र बोस जिन्दाबाद नेताजी जिन्दाबाद
जयहिन्द, जयहिन्द, जयहिन्द
श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी भूलेगा न हिन्दुस्तान
आजादी की खातिर लड़ता रहा सदा ये पुरुष महान
दुर्गा भाभी ने भी आजादी में पूरा साथ दिया
भगत सिंह की साथी बन लाहौर से उन्हें फरार किया
भगवती चरण बोहरा का सुन लो बड़ा अनोखा है बलिदान
बम की परीक्षा करते-करते दे दी इन्होंने अपनी जान
सीताराम राजू ने रक्खी आंध्र प्रदेश की ऊंची शान
बार-बार गोरों पे छापा मारा आखिर दे दिए प्राण
नलनी बागची भी आसाम में अंग्रेजों से डटके लड़े
गोपीनाथ भी डे को मारके, हंसते हुए फांसी पे चढ़े
डॉक्टर अम्बेडकर ने रचा स्वतंत्र भारत का विधान
छूत-छात का भेद मिटाकर किया हरिजनों का उत्थान
मन्मथनाथ गुप्त लाए थे टोली में आजाद को
आजादी के मतवाले जीवित हैं देश हित आज भी वो
दक्षिण भारत के नेता अन्नादुराई बड़े महान
आज भी जिनको तमिलनाडु की जनता पूजे देव समान
खत्म विदेशी राज हो इनकी ये आवाज बुलन्द रही
चैन लिया न जब तक भारत मां जंजीर में बंद रही
आजाद हुआ भारत अपना इनका सपना साकार हुआ
मुख्यमंत्री के पद का जनता ने इन्हें अधिकार दिया
देश की सेवा किए जन्म भर सेवा में ही दिए प्राण
तमिलनाडु ही क्या याद करता उनको सारा हिन्दुस्तान
त्रिपुर कुमारन को रक्खेगा याद हमेशा तमिलनाडु
झण्डा लहराते हुए लाठी खाकर दे दिए थे प्राण त्याग
कौमी शायर बिस्मिल था आजादी का इक दीवाना
निकला वीर शाहजहांपुर से पहिने केसरिया बाना
काकोरी में जाकर उसने शाही खजाना लूट लिया
लूट के माल से ले बंदूकें दल फौलादी बना दिया
गोरे हाकिम लगे ढूंढ़ने जगह-जगह पर बिस्मिल को
आखिर एक दिन पकड़ लिए वो इस सैलानी बादल को
जेल में रहकर भी लिखते रहे वो क्रांति की वाणी
धन्य हैं ऐसे देशभक्त और धन्य है इनकी कुर्बानी
मिलने आई मां तो बोली दूध की तूने रख ली लाज
गाते हुए चल दिए बिस्मिल पहिन शहादत वाला ताज
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है
ये मिट्टी है शहीदों की इसे माथे लगा लो
सम्हालो ऐ वतन वालो, वतन अपना संभालो
किशनसिंह गड़गज अकाली दल के ऊंचे नेता थे
संग साथियों के जा हंसते-हंसते फांसी झूल गए
गुरुद्वारों पर जब गोरों ने, था अपना अधिकार किया
बाबा खड़कसिंह और तारासिंह ने था सीना तान लिया
जो बोले जब तक मिले न चाबी हटेंगे न गुरुद्वारे से
गूंज उठे धरती अंबर गुरु के इस जयकारे से
बोले सो निहाल सत श्री अकाल
ए सतगुरु रहमत तेरी तूं बदली तकदीर हजारां दी
मुर्दयां विच पांव दी जान गई शक्ति तेरे दीदारां दी
खून की होली खेले गोरे लेकिन वो भी अड़े रहे
इन वीरों के लहू के छींटे गुरुग्रन्थ पे जा के पड़े
तब अंग्रेजों की जिद टूटी चाबी इनको देनी पड़ी
सिक्खों की इस बलिदानी से सारी हुकूमत कांप उठी
रुद्र नारायण थे झांसी के किया जिन्होंने काम कमाल
फोटो थे आजाद के रक्खे दीवारों के बीच सम्हाल
आज भी जिंदा हैं यशपाल कि जो आजाद के साथी थे
वायसराय की ट्रेन उलटने में ये थे सबसे आगे
हेमू कालानी था जिसने रेल की पटरी तोड़ी थी
फौजी गाड़ी को उलटाने मौत से किस्मत जोड़ी थी
छोटा-सा इक ग्राम करमसद है गुजरात की धरती पे
जहां पर जन्म लिया था लौह पुरुष सरदार पटेल ने
बारडोली के सत्याग्रह को सफल किया सरदार ने
रुक न सके तराने कौमी, जेलों की दीवारों में
भगवानदास का हुआ भुसावल बम काण्ड में ऊंचा नाम
संग सदाशिव के मारा मुखबिर को अदालत में सरेआम
थे बिहार के प्यारे नेता बाबू राजेन्द्र प्रसाद
रौलेट एक्ट न मानेंगे, ये खड़े हुए बनकर फौलाद
पटियाला के ऊधम सिंह की बड़ी अजब कुर्बानी है
जिसके नाम से जलियां वाले बाग की बंधी कहानी है
सभा लगी थी विद्रोहियों की बाग में बैसाखी के दिन
कर दिया फायर डायर ने और मारे देश भगत गिन-गिन
माताओं के कितने की बेटे मौत के घाट उतार दिए
कितने दीपक बुझा दिए कितने सिन्दूर उजाड़ दिए
खाई कसम ऊधम सिंह ने हत्या का बदला लूंगा
मौका मिलते ही डायर को मौत की नींद सुला दूंगा
ढूंढते-ढूंढ़ते डायर को आखिर वह लंदन आ ही गया
बीस बरस के बाद भी वो गोली से उसे उड़ा ही गया
पकड़ा गया तो नाम बताया राम मोहम्मद सिंह आजाद
जिस दिन फांसी हुई पुकारा देश ऊधम सिंह जिन्दाबाद
ऊधम सिंह जिन्दाबाद...
भगत सिंह की माता ने नारी का किया था ऊंचा भाल
देश की खातिर हंसते हुए कुर्बान कर दिया अपना लाल
जन्मे जहां पर वीर भगत सिंह अमर हुआ बंगा ग्राम
सन 1907 सितम्बर भूलेगा न हिन्दुस्तान
होके जवां भगत सिंह ने छेड़ा क्रांति का आंदोलन
जगह-जगह से जमा हुए, आजादी के अनमोल रतन
उठा शेर पंजाब का लाला लाजपतराय जिसका नाम
वापस जाओ वापस जाओ सायमन मिशन तुम्हारा है नाकाम
मैन्डर्स और स्कॉट, दोनों टूट पड़े लालाजी पर
सर पर लाठी पड़ने लगी और बहने लगा लहू सर-सर
लालाजी की कुर्बानी से भगत सिंह को क्रोध चढ़ा
ठान ली मन में लेके रहूंगा इस अपमान का मैं बदला
राजगुरु, सुखदेव, चन्द्रशेखर और जयगोपाल के साथ
माल रोड पर पहुंचे सेन्डर्स डी.एस.पी. चढ़ के मोटरसाइकिल पर
माल रोड से चला जा रहा था मस्ती में अपने घर
भगत सिंह ने सरेआम गोली का निशाना बना दिया
लालाजी के खून का बदला खून से उसने चुका दिया
फिर भारत को जगाने और सच्ची आवाज सुनाने को
एसेम्बली में बम फेंका, गोरी सरकार हिलाने को
इंकलाब जिन्दाबाद, इंकलाब जिन्दाबाद
आखिर चले भगत सिंह जिस दिन पहन के फांसी का चोला
गाता चला संग उनके राजगुरु, सुखदेव का भी टोला
मेरा रंग दे बसंती चोला...
क्रांतिकारी अशफाक उल्ला बिस्मिल का था दाहिना हाथ
काकोरी के कांड में इसने भी बिस्मिल का दिया था साथ
पढ़ी नमाज और रोजा रक्खा, दिन था जिस दिन फांसी का
मौत से मिलने चला ये वीर, मतवाला आजादी का
कोई आरजू नहीं है, है आरजू तो है ये
रख दे कोई जरा सी खाके वतन कफन में
पन्द्रह साल की आयु में ही, चन्द्रशेखर आजाद ने
नंगी पीठ पे बेंतें खाईं असहयोग आंदोलन में
हुए बड़े तो क्रांतिकारियों के ये सेनापति बने
क्या काकोरी क्या लाहौर हर रण के महारथी बने
बरसों इनको ढूंढ़ा आखिर एक दिन पुलिस की इक टोली
इनका ठिकाना पा ही गई और बरसा दी इन पर गोली
एलफ्रेड पार्क में युद्ध हुआ इलाहाबाद की धरती पे
एक-एक कर भून दिए कितने ही सिपाही गोली से
जीते जी न पकड़ सकी जिसको ये अंग्रेजी सरकार
चन्द्रशेखर आजाद था वो माने जिसको सारा संसार
अंतिम गोली पास बची तो अपना प्रण उसे आया याद
जीते जी आजाद रहा हूं मरूंगा भी तो मैं आजाद
चला दी वन्दे मातरम कहकर खुद पर ही अंतिम गोली
भारत मां के लाल ने खेली अपने खून से खुद होली
यही तो मर के जीना है, वतन पे मरने वालो
सम्हालो ऐ वतन वालो, वतन अपना सम्हालो
0 टिप्पणियाँ